शुक्रवार, 9 सितंबर 2016

प्रकृति का संदेश


हरी - भरी धरती नीले अम्बर की छाँव
प्रकृति की शोभा बढाते ये गाँव।
सूर्य चमक कर देता खुशहाली का सन्देश,
हवा महककर बोली; "मैं तो घूमी हर देश"।।

चँदा ने सिखाया देना सबको नया उजाला,
तारे कहते ; गीत सुनाओ सबको मस्ती वाला।
देना सीखो ये ही तो  है प्रकृति का सन्देश !
हवा महक कर बोली;"मैं तो घूमी सब देश"।।


जीवन की जरूरत पूरी करते ये वृक्ष हमारे,
बिन इनके तो अधूरे हैं जीवन के सपने सारे।
धरती की प्यास बुझाना नदियों का लक्ष्य -विशेष,
हवा महक कर बोली; "मै तो घूमी सब देश" ।।

देखो ! आसमान ने पूरी, धरती को ढक डाला है,
धरती ने भी तो सबको ,माँ जैसा सम्भाला है।
अपनेपन  से सब रहना, ये है इनका सन्देश,
हवा महक कर बोली; "मैं त़ो घूमी सब देश"।।


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