शनिवार, 25 फ़रवरी 2017

"पुष्प और भ्रमर"





तुम गुनगुनाए तो मैने यूँ समझा........
प्रथम गीत तुमने मुझे ही सुनाया
तुम पास आये तो मैं खिल उठी यूँ.....
अनोखा बसेरा मेरे ही संग बसाया ।

हमेशा रहोगे तुम साथ मेरे...।.
बसंत अब हमेशा खिला ही रहेगा
तुम मुस्कुराये तो मैंं खिलखिलाई......
ये सूरज सदा यूँ चमकता रहेगा ।

न आयेगा पतझड़ न आयेगी आँधी.......
मेरा फूलमन यूँ ही खिलता रहेगा
तुम सुनाते रह़ोगे तराने हमेशा....
और मुझमें मकरन्द बढता रहेगा

तुम्हें और जाने की फुरसत न होगी.....
मेरा प्यार बस यूँ ही फलता रहेगा ।।

           "मगर अफसोस" !!!

तुम तो भ्रमर थे मै इक फूल ठहरी......
वफा कर न पाये ? / था जाना जरूरी ?
मैंं पलकें बिछा कर तेरी राह देखूँ.....                      
ये इन्तजार अब यूँ ही चलता रहेगा ।

मौसम में जब भी समाँ लौट आये.....
मेरा दिल हमेशा तडपता रहेगा .........


*कि ये "शुभ मिलन" अब पुनः कब बनेगा*
   

                                                      ...सुधा देवरानी*







                                                   

             




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