रविवार, 14 मई 2017

"माँ"




माँ इतनी आशीष दें !
कर सके कोई अर्पण तुम्हें...
प्रेम से तुमने सींचा हमें
बढ सकें यूँ कि छाँव दें तुम्हें...


माँ के ख्वाबों को आबाद कर
मंजिलों तक पहुँच पायेंं हम
सपने बिखरे न माँ के कोई
काम इतना तो कर जाएंं हम

माँ के आँचल की साया तले
हम बढें तपतपी राह में...
ना डरें मुश्किलों से कभी
ना गलत राह अपनायें हम......

माँ का आशीष हमेशा रहे
प्रभु ! इतना हमें "वर" दे...
माँ से ही तो है संसार ये..
माँ के चरणों में हम बने रहें...






चित्र :-गूगल से...साभार
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