रविवार, 17 दिसंबर 2017

रिश्ते




थोड़ा सा सब्र ,
थोड़ी वफा ...
थोड़ा सा प्यार ,
थोड़ी क्षमा...
जो जीना जाने रिश्ते
रिश्तों से है हर खुशी.....

फूल से नाजुक कोमल
ये महकाते घर-आँगन
खो जाते हैं गर  ये तो
लगता सूना सा जीवन....
       
क्या खोया क्या पाया,
नानी -दादी ने बैठे-बैठे......
यही तो हिसाब लगाया
क्या पाया जीवन में ,जिसने
इनका प्यार न पाया......
     
 दादाजी-नानाजी की वो नसीहत
 मौसी-बुआ  का प्यार.........
 चाचू-मामू संग सैर-सपाटे
 झट मस्ती तैयार.......
     
 कोई हँसाए तो कोई चिढ़ाए
 कोई पापा की डाँट से बचाए
 जीवन के सारे गुर सीख जायें
 हो अगर संयुक्त परिवार......
 
कितनी भी दौड़ लगा लें
कितना भी आगे जा लें
सूरज चंदा से मिले या,
तारे भी जमीं पर ला लें ।
दुनिया भर की शाबासी से
दिल को चैन कहाँ है ?
अपनोंं के आशीष में ही ,
अपना तो सारा जहाँ है ।
जो जीना जाने रिश्ते
रिश्तों से  है हर खुशी........

बड़ी ही कोमल नाजुक सी डोरी से
बंधे प्रेम के रिश्ते ।
समधुर भावोंं की प्रणय बन्धन से
जीवन  को सजाएं रिश्ते ।
जोश-जोश में भावावेश में
टूट न जायें रिश्ते ।
बड़े जतन से बड़े सम्भलकर
चलो निभाएं रिश्ते. ।
रिश्तों से है हर खुशी............

व्यावसायिकता को रिश्तों पर
हावी न होने दें तो........
लेन-देन और उपहारों की तुलना
से दूर रखें तो........
अहंकार मद त्याग, सुलभ अपनापन
अपनायें तो......
चिर-जीवन रिश्तों की बगिया हम
महकायें तो......
खुशियों की सौगात लिए आते
जीवन में रिश्ते.....
हर दुख-सुख में साथ निभाते
प्यारे से ये रिश्ते.....
जो जीना जाने रिश्ते
रिश्तों से है हर खुशी.......

                            चित्र : साभार गूगल से

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